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मार्गदर्शन

डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम (Hindi)

अपडेट किया गया 3 जून 2026

Applies to England

यह छोटा एनिमेशन गर्भावस्था में डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम के लिए स्क्रीनिंग के बारे में बताता है।

डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम

स्क्रीनिंग का उद्देश्य

इस स्क्रीनिंग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आपके बच्चे को डाउन सिंड्रोम (ट्राइसॉमी 21 या T21), एडवर्ड्स सिंड्रोम (ट्राइसॉमी 18 या T18) या पटाऊ सिंड्रोम (ट्राइसॉमी 13 या T13) होने की कितनी संभावना है।

स्क्रीनिंग कराना आपका चयन है। आपको स्क्रीनिंग जाँच कराना ज़रूरी नहीं है। कुछ लोग यह पता लगाना चाहते हैं कि उनके बच्चे को इन स्थितियों में से कोई एक है या नहीं और कुछ लोग नहीं। स्क्रीनिंग सटीक नहीं है और गलत परिणाम दे सकती है। इसके कारण आपको अपनी गर्भावस्था के बारे में निजी निर्णय लेने पड़ सकते हैं।

स्क्रीनिंग का अवलोकन

स्क्रीनिंग प्रक्रिया में कई अलग-अलग जाँचें शामिल हो सकती हैं।

पहली स्क्रीनिंग जाँच जो आपको दी जाएगी वह या तो कंबाइंड टेस्ट या क्वाड्रपल टेस्ट है। इसके बाद आपको दूसरी स्क्रीनिंग जाँच की पेशकश की जा सकती है। इसे नॉन-इनवेसिव प्रीनेटल टेस्टिंग (NIPT) कहा जाता है। इनमें से किसी भी स्क्रीनिंग जाँच के बाद, आपको नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) की पेशकश की जा सकती है। यह इस बात की पुष्टि करेगा कि आपके बच्चे को इन स्थितियों में से कोई एक है या नहीं।

NHS वेबसाइट पर डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।

इन स्थितियों के बारे में

हमारे शरीर की कोशिकाओं के अंदर गुणसूत्र (क्रोमोसोम) नामक छोटी संरचनाएँ होती हैं। ये DNA (आनुवंशिक सामग्री) से बने होते हैं। ये गुणसूत्र (क्रोमोसोम) उन जीन्स को ले जाते हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि हम कैसे विकसित होते हैं। आमतौर पर हर कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र (क्रोमोसोम) होते हैं। शुक्राणु (स्पर्म) या अंडाणु (एग) कोशिकाओं में परिवर्तन हो सकते हैं, जिससे बच्चे में एक अतिरिक्त गुणसूत्र (क्रोमोसोम) हो सकता है।

डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम या पटाऊ सिंड्रोम वाले बच्चे हर उम्र की महिलाओं को पैदा होते हैं। हालाँकि, जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है, इनमें से किसी एक स्थिति वाले बच्चे के होने की संभावना बढ़ जाती है। ये सभी शरीर की कुछ या सभी कोशिकाओं में एक गुणसूत्र (क्रोमोसोम) की अतिरिक्त प्रति (कॉपी) होने के कारण होते हैं। केवल कुछ कोशिकाओं में अतिरिक्त गुणसूत्र (क्रोमोसोम) होने को मोज़ेक फॉर्म कहा जाता है। इससे बच्चे पर हल्के प्रभाव पड़ सकते हैं। स्क्रीनिंग यह नहीं पहचान सकती कि आपके बच्चे को कौन सा रूप या किस स्तर की विकलांगता होगी।

डाउन सिंड्रोम (T21)

डाउन सिंड्रोम शरीर की सभी या कुछ कोशिकाओं में गुणसूत्र 21 (क्रोमोसोम 21) की एक अतिरिक्त प्रति (कॉपी) के कारण होता है। डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्ति को किसी न किसी स्तर की सीखने की अक्षमता (लर्निंग डिसेबिलिटी) होगी। इसका मतलब है कि उन्हें अधिकतर लोगों की तुलना में नई चीज़ों को समझने और सीखने में ज़्यादा मुश्किल होगी। उन्हें बातचीत में चुनौतियों और रोज़मर्रा के कुछ कामों को करने में कठिनाई हो सकती है। डाउन सिंड्रोम वाले लोगों के चेहरे की विशिष्ट विशेषताएँ होती हैं लेकिन वे सभी एक जैसे नहीं दिखते।

डाउन सिंड्रोम वाला एक बच्चा

डाउन सिंड्रोम वाले अधिकांश बच्चे मुख्यधारा (मेनस्ट्रीम) के स्कूलों में जाते हैं लेकिन उन्हें अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होगी। कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में अधिक आम हैं। इनमें हृदय की स्थितियाँ और सुनने और देखने में समस्याएँ शामिल हैं। कई स्वास्थ्य स्थितियों का इलाज किया जा सकता है। दुर्भाग्य से, 100 में से लगभग 5 बच्चे (5%) अपने पहले जन्मदिन तक जीवित नहीं रह पाते हैं।

गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के बिना पैदा हुए बच्चों के लिए, जीवित रहने की दर अन्य बच्चों के समान होती है। डाउन सिंड्रोम वाले अधिकांश लोग 60 साल या उससे अधिक उम्र तक जीवित रहेंगे।

डाउन सिंड्रोम वाले लोग जीवन की अच्छी गुणवत्ता पा सकते हैं और अधिकांश का कहना है कि वे अपने जीवन का आनंद लेते हैं। सहायता के साथ, डाउन सिंड्रोम वाले कई लोग वयस्क होने पर नौकरी पा सकते हैं, रिश्ते बना सकते हैं और आंशिक रूप से स्वतंत्र (सेमी-इंडिपेंडेंट) रूप से रह सकते हैं।

एडवर्ड्स सिंड्रोम (T18) और पटाऊ सिंड्रोम (T13)

एडवर्ड्स सिंड्रोम वाले बच्चों में सभी या कुछ कोशिकाओं में गुणसूत्र 18 (क्रोमोसोम 18) की एक अतिरिक्त प्रति (कॉपी) होती है। पटाऊ सिंड्रोम वाले बच्चों में सभी या कुछ कोशिकाओं में गुणसूत्र 13 (क्रोमोसोम 13) की एक अतिरिक्त प्रति (कॉपी) होती है।

दुख की बात है कि जीवित रहने की दर कम होती है। जो बच्चे जीवित पैदा होते हैं, उनमें से एडवर्ड्स सिंड्रोम वाले हर 100 में से लगभग 13 (13%) और पटाऊ सिंड्रोम वाले हर 100 में से 11 (11%) बच्चे ही अपने पहले जन्मदिन तक जीवित रह पाते हैं। कुछ बच्चे वयस्क होने तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन ऐसा दुर्लभ है।

एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम के साथ पैदा हुए सभी बच्चों को सीखने की अक्षमता (लर्निंग डिसेबिलिटी) और कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियाँ होंगी। इनमें से कुछ बेहद गंभीर हो सकती हैं। उन्हें अपने हृदय, श्वसन तंत्र (रेस्पिरेटरी सिस्टम), गुर्दों या पाचन तंत्र (डाइजेस्टिव सिस्टम) में समस्याएँ हो सकती हैं।

पटाऊ सिंड्रोम वाले लगभग आधे बच्चों को कटा होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट) भी होगा। एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम वाले बच्चों का जन्म के समय कम वज़न (लो बर्थवेट) हो सकता है।

चुनौतियों के बावजूद, बच्चे अपने विकास में धीरे-धीरे प्रगति कर सकते हैं। इन दोनों में से किसी भी स्थिति वाले बड़े बच्चों को एक विशेषज्ञ स्कूल में जाने की आवश्यकता होगी।

हर 10,000 जन्मों में से 10 में डाउन सिंड्रोम होता है। हर 10,000 जन्मों में से 3 में एडवर्ड्स सिंड्रोम होता है। हर 10,000 जन्मों में से 2 में पटाऊ सिंड्रोम होता है।

NHS कंबाइंड और क्वाड्रपल स्क्रीनिंग जाँचें

यदि आप कंबाइंड टेस्ट कराने का विकल्प चुनती हैं, तो इसमें शामिल होगा:

  • गर्भावस्था के 10 से 14 सप्ताह के बीच एक रक्त जाँच
  • आपके बच्चे की गर्दन के पीछे तरल पदार्थ को मापने के लिए 11 से 14 सप्ताह की गर्भावस्था के बीच एक अल्ट्रासाउंड स्कैन - इसे न्यूकल ट्रांसलूसेंसी (NT) के रूप में जाना जाता है

आपके बच्चे को यह स्थिति होने की संभावना का पता लगाने के लिए इस जानकारी को आपकी उम्र के साथ जोड़ा जाता है। यदि आप 14 सप्ताह से अधिक की गर्भवती हैं तो कंबाइंड टेस्ट उपयुक्त नहीं है। इसके बजाय आपको क्वाड्रपल टेस्ट की पेशकश की जाएगी। इसमें गर्भावस्था के 14 से 20 सप्ताह के बीच रक्त जाँच शामिल है। यह जाँच केवल डाउन सिंड्रोम के लिए स्क्रीनिंग करती है और कंबाइंड टेस्ट जितनी सटीक नहीं है।

आपको एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम की स्क्रीनिंग के लिए 20-सप्ताह वाले स्क्रीनिंग स्कैन की पेशकश की जाएगी।

जाँच की सुरक्षा

स्क्रीनिंग जाँच आपको या आपके बच्चे को नुकसान नहीं पहुँचा सकती। हालाँकि, इस पर ध्यान से विचार करना महत्वपूर्ण है कि यह जाँच करानी है या नहीं।

यह जाँच आपको यह नहीं बता सकती कि आपके बच्चे को निश्चित रूप से इनमें से कोई एक स्थिति है। यह ऐसी जानकारी प्रदान कर सकती है जिसके कारण आपको अपनी गर्भावस्था के बारे में और निर्णय लेने पड़ सकते हैं।

स्क्रीनिंग कराना आपका चयन है

स्क्रीनिंग कराना आपका चयन है। आपको स्क्रीनिंग जाँच कराना ज़रूरी नहीं है। कुछ लोग यह पता लगाना चाहते हैं कि उनके बच्चे को इन स्थितियों में से कोई एक है या नहीं और कुछ लोग नहीं। स्क्रीनिंग सटीक नहीं है और गलत परिणाम दे सकती है। इसके कारण आपको अपनी गर्भावस्था के बारे में व्यक्तिगत निर्णय लेने पड़ सकते हैं।

आप निम्न रूप से चुन सकती हैं:

  • कोई स्क्रीनिंग नहीं
  • डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम के लिए स्क्रीनिंग
  • केवल डाउन सिंड्रोम के लिए स्क्रीनिंग
  • केवल एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम के लिए स्क्रीनिंग

यह स्क्रीनिंग तब पेश की जाएगी जब आपके गर्भ में एक बच्चा या जुड़वाँ बच्चे हों।

यदि आपकी वैनिश्ड ट्विन प्रेगनेंसी है, तो आपकी दाई (मिडवाइफ) या डॉक्टर आपके साथ आपकी जाँच के विकल्पों पर चर्चा करेंगे।

संभावित परिणाम

इस आधार पर कि आपने स्क्रीनिंग जाँच कराने का निर्णय लेते समय क्या माँगा था, हम आपको इनमें से एक या दोनों देंगे:

  • डाउन सिंड्रोम के लिए एक परिणाम
  • एडवर्ड्स सिंड्रोम और पटाऊ सिंड्रोम के लिए एक संयुक्त परिणाम

कम संभावना वाले परिणाम का मतलब है कि यह संभावना नहीं है, हालाँकि फिर भी संभव है, कि आपके बच्चे को जाँची गई स्थितियों में से कोई भी होगी। अधिकतर स्क्रीनिंग जाँच के परिणाम कम संभावना वाले होते हैं।

अधिक संभावना वाले परिणाम पाने वाली अधिकतर महिलाओं को बिना किसी स्थिति के बच्चा होगा। कुछ महिलाओं को एक स्थिति के लिए अधिक संभावना वाला परिणाम मिलेगा और बच्चे को एक अलग स्थिति होगी। उदाहरण के लिए, यदि आपको डाउन सिंड्रोम के लिए अधिक संभावना वाला परिणाम मिलता है, तो संभावना है कि बच्चे को पटाऊ सिंड्रोम है। कुल मिलाकर, हर 100 स्क्रीनिंग जाँच के परिणामों में से लगभग 3 अधिक संभावना वाले होते हैं।

आपको प्रत्येक परिणाम एक संभावना के रूप में प्राप्त होगा, उदाहरण के लिए आपके बच्चे को डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होने की ‘150 में से 1 संभावना’ है। दूसरी संख्या (जैसे 150) जितनी बड़ी होगी, आपके बच्चे के उस स्थिति के साथ पैदा होने की संभावना उतनी ही कम होगी। इसलिए ‘200 में से 1 संभावना’ ‘100 में से 1 संभावना’ से कम है।
‘कम संभावना’ वाला परिणाम 151 या उससे अधिक में से 1 संभावना है (उदाहरण के लिए, 300 में से 1 संभावना)। ‘अधिक संभावना’ वाला परिणाम 150 तक में से 1 संभावना है (उदाहरण के लिए, 100 में से 1 संभावना)।
यह समझने के लिए कि, उदाहरण के लिए, ‘300 में से 1 संभावना’ का क्या मतलब है, 300 महिलाओं के एक समूह की कल्पना करें। इन महिलाओं में से एक ऐसे बच्चे के साथ गर्भवती होगी जिसे यह स्थिति है।

जाँच न कराना

यदि आप इन स्थितियों के लिए स्क्रीनिंग जाँच न कराने का विकल्प चुनती हैं, तो आपकी बाकी प्रसवपूर्व देखभाल (एंटेनेटल केयर) योजना के अनुसार जारी रहेगी।

आपकी गर्भावस्था के दौरान कोई भी स्कैन आपके बच्चे के साथ शारीरिक समस्याओं का पता लगा सकता है जो इन स्थितियों से संबंधित हो सकती हैं। यदि स्कैन के दौरान कुछ भी अप्रत्याशित पाया जाता है तो आपको हमेशा बताया जाएगा।

मेरे परिणाम प्राप्त करना

यदि आपकी स्क्रीनिंग जाँच कम संभावना वाला परिणाम दिखाती है, तो आपको जाँच किए जाने के 2 सप्ताह के भीतर बता दिया जाएगा। यदि आपकी स्क्रीनिंग जाँच अधिक संभावना वाला परिणाम दिखाती है, तो आपको जाँच कराने के एक सप्ताह के भीतर बता दिया जाएगा। आपको चर्चा करने के लिए एक अपॉइंटमेंट की पेशकश की जाएगी:

  • जाँच के परिणाम और उनका क्या मतलब है
  • वह स्थिति जो आपके बच्चे को हो सकती है
  • आपके लिए उपलब्ध विकल्प

आगे की जाँचें

यदि आपका परिणाम कम संभावना वाला है तो आपको आगे की जाँच की पेशकश नहीं की जाएगी। यदि आपका परिणाम अधिक संभावना वाला है, तो आपको पेशकश की जाएगी:

  • कोई और जाँच नहीं
  • एक दूसरी स्क्रीनिंग जाँच (जिसे NIPT कहा जाता है) ताकि नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) कराने का विकल्प चुनने से पहले अधिक सटीक स्क्रीनिंग परिणाम प्राप्त किया जा सके
  • एक नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट)

यदि आपकी पहली स्क्रीनिंग जाँच से बहुत अधिक संभावना (10 में से 1 और 2 में से 1 के बीच) वाला परिणाम आता है, तो आपको अपने विकल्पों के बारे में एक स्वास्थ्य सेवा पेशेवर के साथ गहन चर्चा करनी चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि NIPT कम सटीक होता है जब आपको एडवर्ड्स सिंड्रोम या पटाऊ सिंड्रोम के लिए बहुत अधिक संभावना वाला परिणाम मिलता है।

आपके निर्णयों का सम्मान किया जाएगा, और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर आपका समर्थन करेंगे। यदि आपको लगता है कि आपके निर्णयों का सम्मान नहीं किया जा रहा है तो आपको आवाज़ उठानी चाहिए। जानकारी सहायता संगठनों से भी उपलब्ध है। स्क्रीनिंग या नैदानिक जाँचों (डायग्नोस्टिक टेस्ट) में से किसी से भी आपको जो भी परिणाम मिलें, आपको यह तय करने में मदद करने के लिए समर्थन और देखभाल मिलेगी कि आगे क्या करना है।

गैर-आक्रामक प्रसवपूर्व जाँच (NIPT)

आपको NIPT नामक दूसरी स्क्रीनिंग जाँच की पेशकश की जा सकती है, जिसमें रक्त जाँच शामिल है।

NIPT कंबाइंड या क्वाड्रपल टेस्ट की तुलना में अधिक सटीक है, हालाँकि यह जुड़वाँ गर्भावस्थाओं में उतनी सटीक नहीं है। यह आपके रक्त में DNA (आनुवंशिक सामग्री) को मापकर काम करता है। इसमें से कुछ DNA बच्चे के गर्भनाल (प्लेसेंटा) से होगा। यदि गुणसूत्र (क्रोमोसोम) 21, 18 या 13 से अपेक्षा से अधिक DNA है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपके बच्चे को डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम या पटाऊ सिंड्रोम है। हालाँकि, हर स्क्रीनिंग जाँच की तरह, यह कोई निश्चित उत्तर नहीं देती है। NIPT आपके बच्चे को नुकसान नहीं पहुँचा सकती। अधिकतर महिलाओं को 2 सप्ताह के भीतर अपना परिणाम मिल जाएगा।

अधिकतर महिलाओं को कम संभावना वाला परिणाम मिलेगा, जिसका अर्थ है कि आपके बच्चे को इन स्थितियों में से कोई भी होने की संभावना कम है। आपको नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) की पेशकश नहीं की जाएगी।

यदि आपका NIPT परिणाम अधिक संभावना वाला परिणाम दिखाता है, तो आपके बच्चे को इन स्थितियों में से कोई भी होने की संभावना अधिक है। फिर आपको नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) की पेशकश की जाएगी, और यह आप पर निर्भर है कि आप इसे कराना चुनती हैं या नहीं। कम संख्या में मामलों में, NIPT का कोई परिणाम नहीं निकल सकता है। तब आप एक और NIPT, एक नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) या कोई और जाँच न कराने के बीच चयन कर सकती हैं।

प्रयोगशाला (लैबोरेटरी) आपके NIPT स्क्रीनिंग नमूने (सैंपल) को 5 साल तक रख सकती है। यह गुणवत्ता और जाँच उद्देश्यों के लिए है। यदि आप नहीं चाहती हैं कि आपका नमूना (सैंपल) रखा जाए, तो अपने स्वास्थ्य सेवा पेशेवर को बताएँ।

नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) (कोरियोनिक विलस सैंपलिंग या एम्नियोसेंटेसिस)

नैदानिक जाँचें (डायग्नोस्टिक टेस्ट) एक निश्चित उत्तर देती हैं। वे गर्भनाल (प्लेसेंटा) या आपके बच्चे के आस-पास के तरल पदार्थ से कोशिकाओं की जाँच करती हैं।

नैदानिक जाँचें (डायग्नोस्टिक टेस्ट) कभी-कभी डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम या पटाऊ सिंड्रोम के अलावा अन्य स्थितियों का भी पता लगा सकती हैं। हालाँकि, ऐसा दुर्लभ है।

नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) कराने वाली 200 में से लगभग 1 महिला (0.5%) का जाँच के कारण गर्भपात (मिसकैरेज) हो जाएगा। यह आप पर निर्भर है कि आप नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) कराती हैं या नहीं।

2 प्रकार की नैदानिक जाँचें (डायग्नोस्टिक टेस्ट) होती हैं: कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (CVS) और एम्नियोसेंटेसिस।

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (CVS)

यह आमतौर पर गर्भावस्था के 11 से 14 सप्ताह तक किया जाता है लेकिन बाद में भी किया जा सकता है। गर्भनाल (प्लेसेंटा) से ऊतक (टिशू) का एक छोटा नमूना (सैंपल) लेने के लिए एक पतली सुई का उपयोग किया जाता है। सुई आमतौर पर महिला के पेट के माध्यम से डाली जाती है। गर्भनाल (प्लेसेंटा) की कोशिकाओं की उन स्थितियों के लिए जाँच की जा सकती है जिनकी स्क्रीनिंग की गई है।

एम्नियोसेंटेसिस

यह आमतौर पर गर्भावस्था के 15 सप्ताह के बाद किया जाता है। बच्चे के आस-पास के तरल पदार्थ का एक छोटा नमूना (सैंपल) इकट्ठा करने के लिए एक पतली सुई का उपयोग किया जाता है। सुई महिला के पेट के माध्यम से डाली जाती है। तरल पदार्थ में बच्चे की कुछ कोशिकाएँ होती हैं, जिनकी इन स्थितियों के लिए जाँच की जा सकती है।

नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) के परिणाम

नैदानिक जाँच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) के बाद, कुछ महिलाओं को पता चलेगा कि उनके बच्चे को डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम या पटाऊ सिंड्रोम है। वे तब गर्भावस्था को जारी रखने का विकल्प चुन सकती हैं या गर्भावस्था को जारी न रखने का फैसला कर सकती हैं और गर्भपात (टर्मिनेशन) करा सकती हैं।

यदि आप इस विकल्प का सामना करती हैं, तो स्वास्थ्य सेवा पेशेवर आपका समर्थन करेंगे और आपको निर्णय लेने में मदद करने के लिए स्थिति के बारे में और जानकारी देंगे।

जानकारी सहायता संगठनों से भी उपलब्ध है।

NHS वेबसाइट पर अधिक जानकारी और सहायता संगठनों का विवरण प्राप्त करें।

इस लीफलेट के बारे में

उपरोक्त चित्र (फोटोग्राफ) का उपयोग करने की अनुमति के लिए डाउन सिंड्रोम एसोसिएशन का धन्यवाद।